टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी – बचपन कोट्स इन हिंदी

टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी

टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी
टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी

हेलो फ्रेंड्स आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग में।दोस्तो आज का हमारा टॉपिक है “टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी“। वैसे तो दोस्तो टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी इस टॉपिक पर जितना बोलू उतना कम है। बचपन एक मजेदार समय होता है। ना किसीसे कोई शिकायतें और ना किसीसे कोई अनबन। सब अपनी अपनी ज़िंदगी मे धुंद होते थे। लेकिन जब भी बचपन की याद आती है तो कही न कही आपकी आँखों मे कुछ आंसू जरूर लाती हैं। बचपन है ही ऐसा जो सब वापस पाना चाहते है। काश ज़िंदगी मे कोई रिवाइंड का बटन होता तो रिवाइंड करके वापस बच्चे बन जाते। बचपन की बातें ही कुछ और थीं।वो लड़ना झगड़ना वो बचपन की कट्टी बट्टी। वो बचपन की सच्ची मुच्ची वाली दोस्ती। सच मे ये सब याद आता है तो आँखों मे आंसू आ जाते है। कही न कही हमने हमारे अंदर के बच्चे को दबाकर रखा है। तो उसे आज़ाद कर दो और खुलकर अपनी ज़िंदगी जी लो। खुलकर जिओ। तो चलिए शुरू करते है हमारा आज का टॉपिक टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी।

सबसे टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी

◆बचपन मे शाम हुआ करती थी। मगर अब सुबह के बाद सीधे रात होती है।

◆बचपन में सोचा करते थे कि कब हम बड़े होंगे। और जब बड़े हुए तब सोचा। काश हम बड़े ही ना होते।

◆वक़्त भी बड़ा अजीब निकला।
जवानी देकर सारा बचपन ले गया।

◆बचपन भी कमाल का था। जो मांग लू वो मिल जाता था। और जब बड़े हुए तो जो भी चाहू वो खुद ले सकता हु मगर हज़ार बार सोचना पड़ता है।

◆बचपन मे सोचा करते थे। हम बड़े कब होंगें। अब सोचते है हम बच्चे ही ठीक थे। हम बड़े क्यों हुए।

◆बचपन मे चोट लगने पर माँ हल्दी लगाती थी।
अब दिल के टुकड़े भी हो जाते है तो कोई संभालने तक नही आता।

◆बचपन मे हम जब चाहे रोना शुरू कर देते थे क्योंकि हमे पता था कि माँ संभालने जरूर आएगी।
अब बड़े हुए तो रोने से भी डर लगता है कि कही कोई जख्म पर मरहम की जगह नमक ना लगा दे।

◆वो बचपन की नदियां ना जाने कहा चली गई। जिसमें हमारे जहाजे चला करती थीं।

◆बचपन की याद ना दिला ऐ दोस्त। नही तो यही एक समंदर बन जायेगा।

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◆बचपन मे जब दिल चाहे तब रो लेते थे। जहा चाहे रो लेते थे। लेकिन अब तो रोने के लिए भी जगह ढूंढनी पड़ती है।

◆बचपन मे जब दिल चाहे तब रो लेते थे। मगर अब तो रोने के लिए भी तकिये का सहारा लेना पड़ता है।

◆बचपन मे सिर्फ रुसवाई थीं। और अब दुश्मनी हुआ करती है।

◆बचपन का वो एक रुपया। आज भी सौ रुपये की बराबरी नही कर सकता।

◆अब भी याद आता है वो मेहमानों का आना।
जो जाते वक्त हाथ मे कुछ रुपये थमा देते थे।
मगर जब हुए बड़े। तो वही मेहमान आज तानो के सुर सुनाया करते है।

◆आज तक कोई गाना नही बना। जो बचपन की कविताओं का मुकाबला कर सके।

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◆ना जाने हम कब बड़े हो गए।
चड्डी से हम पैंट मे आ गए।

◆बचपन की वो ख्वाहिश बडे होने की।
अब जाकर पता चला वो ख्वाहिश नही सज़ा थी जो दिल से हमने अपने लिए मांग ली थी।

◆बचपन के गलियों की वो क्रिकेट की यादें आज भी रुला देती है।
दीवार को लगा तो वंडी और तूड़ी और अगर डायरेक्ट लगा तो आउट।

◆बचपन मे भवरे से खेलने वाले हम।
आज ज़िन्दगी ने भवरा बना दिया है।
जैसा मन चाहे हमे बस घुमा रही है।

◆दे दिया इस्तीफा हमने बचपन का।
अब उम्र कैद हुई है जो बुढापे के बाद ही खत्म होगी।

◆बचपन के वो कपड़े भी अब महंगे लगने लगे है।
चाहे कितना ही पैसा देकर क्यों ना खरीद हु। हमे आते ही नही है।

◆झूठ बोलकर भी पकड़ा जाया करते थे हम।
ये उन दिनों की बात है जब बच्चे हुआ करते थे हम।

◆बचपन में हमारे पास घडी नही थी मगर समय बोहत था।
पर अब जब घडी है लेकिन समय नही रहा।

◆बचपन की वो लुपाछुपी ना जाने कहा चली गई।
ज़िंदगी मे आशियाना बनाने की ख्वाहिश हमे कहा से कहा ले आयी।

◆जब बच्चा था तब सब मुझसे प्यार करते थे।
अब जब बड़ा हुआ तो सब नफ़रत करने लगे हैं।

◆ना रोने की वजह थी।
और ना ही हंसने का बहाना।
क्यों बड़े हो गए हम।
इससे अच्छा तो बचपन का जमाना था।

◆बचपन की वो कट्टी बट्टी आज दुश्मनी में तबदील हो गयी।
ना जाने कहा गयी वो सच्ची मुच्ची वाली दोस्ती।

◆बचपन का वो “चल छैया छैया छैया छैया” वाला फ़ोन बोहत याद आता है मगर आज कही मिलता ही नही है।

◆खुद भी रोता है और मुझको भी रुलाता है।
यह बारिश वाला मौसम। मेरे बचपन के जहाजों की याद बोहत दिलाता है।

◆बचपन मे सिर्फ खिलौने टूटा करते थे।
जब बड़े हुए तो हर बार दिल तूटने लगे है।

◆याद आते है वो बचपन के टायर।
याद आते है वो बचपन के झूले।
अब तो ज़िन्दगी हमे झूला झूला रही है।
और हम बिन कुछ कहे झूलते जा रहे हैं।

◆पूरा बचपन टीचर handwriting सुधारने पर जो देती थीं।
पर अब सारी ज़िन्दगी keyboard पर piano बजा कर बीत रही है।

◆बचपन के वो जख्म ना जाने कहा खो गए।
अब तो दिल भी टूटता है तो दर्द छुपाना पड़ता है।

◆शाम तो सिर्फ बचपन मे हुआ करती थीं।
अब तो सिर्फ सुबह और रात हुआ करती है।

◆बचपन मे हम अमीर हुआ करते थे।
खुले आसमान में हमारे भी कागज के ऐरोप्लेन उड़ा करते थे।

◆बचपन मे सिर्फ दो उंगलिया जोड़कर वापस दोस्ती हुआ करती थी।
अब तो माफी मांगने पर भी दुश्मनी खत्म नही होती।

तो दोस्तो आपको हमारा आज का टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी यह विषय कैसा लगा या हमारे बचपन के कोट्स कैसे लगे यह हमें कमेंट करके जरूर बताइयेगा। और अभी तक आपने हमारे ब्लॉग को सब्सक्राइब नही किया है तो अभी सब्सक्राइब कर लीजिये ताकि हमारे आनेवाले हर एक नए विषय की खबर हर एक नए आर्टिकल की खबर आपको सबसे पहले मिलती रहे। तो टॉप बचपन की यादें कोट्स इन हिंदी इसी के साथ मैं आपसे विदा लेता हूं फिर मिलेंगे एक नए आर्टिकल के साथ तब तक के लिए हंसते रहिये मुस्कुराते रहिये और बने रहिये हमारे साथ mygapshup.com पर।
जय हिंद।

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admin

(Amit Balghare) Founder of Mygapshup.com

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